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फिर फ्लॉवर से फायर बने धामी: अभूतपूर्व जीत से मिठास में बदल दी खटीमा की पराजय की खटास, अब सामने हैं ये चुनौतियां

चंपावत उपचुनाव में रिकॉर्ड जीत के बाद अब लोगों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से क्षेत्र के कायाकल्प और विकास की आस है। मैदान और पहाड़ से मिलकर बने इस विधानसभा क्षेत्र में समस्याओं का पहाड़ और चुनौतियों का अंबार है। 

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह फरवरी में चुनाव प्रचार के लिए उत्तराखंड आए थे तो उन्होंने कहा था कि अपना पुष्कर फ्लॉवर भी है और फायर भी। अपना पुष्कर न तो रुकेगा और न ही किसी कीमत पर झुकेगा। हालांकि 10 मार्च को आए परिणाम में सीएम पुष्कर सिंह धामी को खटीमा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी भुवन कापड़ी के हाथों 6579 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था लेकिन उपचुनाव में धामी ने कसर पूरी कर दी।

फरवरी में हुए चुनाव में अपनी सीट गंवाने के बाद भी भाजपा हाईकमान ने धामी पर ही भरोसा जाते हुए सीएम का ताज पहनाया। धामी ने चंपावत से उपचुनाव लड़ा तो राज्य में विधायकी के लिए हुए पांच विधानसभा चुनाव और 14 उपचुनावों के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर 55025 मतों से सबसे बड़ी जीत दर्ज की। राजनाथ सिंह के कथन को सार्थक करते हुए विस चुनाव के परिणाम के 85 दिनों के बाद पुष्कर सिंह धामी फायर बनकर उभरे।

वहीं चंपावत उपचुनाव में रिकॉर्ड जीत के बाद अब लोगों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से क्षेत्र के कायाकल्प और विकास की आस है। मैदान और पहाड़ से मिलकर बने इस विधानसभा क्षेत्र में समस्याओं का पहाड़ और चुनौतियों का अंबार है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, पेयजल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को दिशा दी जानी चाहिए। उन्हें आस है कि मुख्यमंत्रियों की ओर से पूर्व में की गई घोषणाओं को पूरा किया जाएगा। 

विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी जीत

वर्ष        सीट      विजयी प्रत्याशी    जीत का अंतर 
2002     कोटद्वार    सुरेंद्र सिंह नेगी    10837
2007    हरिद्वार     मदन कौशिक    28640
2012    हल्द्वानी    डॉ. इंदिरा हृदयेश     23583
2017     हरिद्वार     मदन कौशिक    24869
2022     रायपुर     उमेश शर्मा काऊ    30052

राज्य में हुए उपचुनावों में जीत का अंतर

वर्ष    सीट                     विजयी प्रत्याशी              जीत का अंतर 
2002    रामनगर            एनडी तिवारी                    23226
2005     कोटद्वार            सुरेंद्र सिंह नेगी                  7900
2007     द्वाराहाट              पुष्पेश त्रिपाठी                    5024
2009    विकासनगर        कुलदीप कुमार                     596
2012    सितारगंज           विजय बहुगुणा                   39966
2014    सोमेश्वर               रेखा आर्या                          10037
2014     धारचूला             हरीश रावत                       20604
2014    डोईवाला            हीरा सिंह बिष्ट                     6512
2015    भगवानपुर           ममता राकेश                    36909
2018    थराली                 मुन्नी देवी शाह                     1981
2019    पिथौरागढ़             चंद्रा पंत                          3267
2021    सल्ट                   महेश जीना                        4697
2022    चंपावत           पुष्कर सिंह धामी                     55025

ये हैं प्रमुख चुनौतियां: सिडकुल की स्थापना

सिडकुल की स्थापना का एलान 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और 2021 में मौजूदा सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खुद किया है। अब तक इस दिशा में कुछ भी पहल नहीं हुई है। लोगों को उम्मीद है कि टनकपुर-बनबसा में सिडकुल की स्थापना कर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 

सेहत को संवारना

चंपावत जिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार करते हुए उसे बेस अस्पताल का दर्जा दिलाना। डायलिसिस यूनिट, टनकपुर उप जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड परीक्षण की सुविधा, सर्जरी शुरू करवाने के अलावा हृदयरोग विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों को भरना। नर्सिंग कॉलेज का इसी सत्र से संचालन करवाना भी चुनौती से कम नहीं है। 

ग्रामीण विकास और ग्रामीण सुविधाओं का विस्तार

सूखीढांग-डांडा-मीडार सड़क से लेकर कई ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क में डामरीकरण व अन्य सुविधा को विस्तार दिया जाना है। नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों की लचर मोबाइल नेटवर्किंग में सुधार की जरूरत है। ग्रामीण सड़कों में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को विस्तार दिया जाना है। 

पर्यटन  

जिले के आर्थिक विकास के लिए पर्यटन सबसे महत्वपूर्ण है। पूर्णागिरि में रज्जुमार्ग का निर्माण लटका है। गोल्ज्यू कॉरिडोर से लेकर मां बाराही धाम, मां पूर्णागिरि धाम, बाबा गोरखनाथ, श्यामलाताल, ब्यानधुरा का सर्किट बनाए जाने की जरूरत है।

तकनीकी और उच्च शिक्षा

चंपावत जिले में नए डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ी है। राज्य बनने से पहले दो कॉलेज थे जो अब बढ़कर सात हो गए हैं लेकिन इन कॉलेजों में विषयों के अनुरूप पाठ्यक्रम नहीं है। पाटी डिग्री कॉलेज प्राइमरी में चल रहा है। आधारभूत सुविधाओं की भी कई कॉलेजों में कमी है। बाराकोट में डिग्री कॉलेज की जरूरत है। लोगों को उम्मीद है कि तीन साल से बंद बनबसा, भिंगराड़ा, दिगालीचौड़ और बाराकोट के आईटीआई का अब संचालन होगा।  

लटके कार्यों को शुरू करवाना

चंपावत जिला जेल का निर्माण 2012 से रुका है। जमीन नहीं मिलने से चंपावत के स्टेडियम का काम शुरू नहीं हो सका है। बनबसा में एलपीजी एजेंसी की स्थापना और स्याला-पोथ मोटर मार्ग को मां पूर्णागिरि धाम से जोड़ना भी चुनौती से कम नहीं है। 

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