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नीतीश कुमार ने BJP से छीनी महाराष्ट्र की खुशी, JDU-RJD गठजोड़ के आगे 2024 में भी आसान नहीं होगी राह

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP)से महाराष्ट्र में फिर से सत्ता हासिल करने की खुशी छीन ली है। भगवा पार्टी को बिहार में एक विकट चुनौती दी है।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP)से महाराष्ट्र में फिर से सत्ता हासिल करने की खुशी छीन ली है। भगवा पार्टी को बिहार में एक विकट चुनौती दी है। बिहार वही राज्य है जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने 40 में से 39 सीटों पर कब्जा किया था।

नीतीश कुमार की नाराजगी को भांपते हुए भाजपा ने सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उनकी आहत भावना को शांत करने की कोशिश की। क्योंकि भगवा पार्टी को भी मालूम है कि 2024 में उसे परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  

भाजपा नेतृत्व ने नीतीश कुमार को मनाने के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार के मुख्यमंत्री को भाजपा के मैत्रीपूर्ण इरादे के बारे में आश्वस्त कराने के लिए दो बार पटना भेजा।  इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि नीतीश कुमार 2025 तक सीएम बने रहेंगे।

2015 के विधानसभा चुनावों में राजद-जद (यू) गठबंधन के हाथों बीजेपी को करारी हार झेलनी पड़ी थी। राजद के पास मुसलमानों और यादवों पर मजबूत पकड़ बनी हुई है। नीतीश और कांग्रेस सहित छोटे-छोटे दलों के साथ आने से यह गठबंधन काफी भारी हो गया है। नीतीश कुमार के पास कुर्मियों और कुशवाहाओं का समर्थन माना जाता है। इसके साथ-साथ अधिकांश पिछड़ी जातियों के बीच भी उनकी लोकप्रियता है। यह समीकरण भाजपा की मुश्किलों को बढ़ा देते हैं।

भाजपा इस चुनौती को पहचानती है। हालांकि, वह इससे डरती नहीं है। उसे ओबीसी समाज से आने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर पूरा भरोसा है। बिहार को उत्तर का तमिलनाडु कहा जाता है, जहां “पिछड़ों” की विशाल आबादी है। हालांकि, उत्तर भारत के अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी हिंदुत्व के समर्थन में वृद्धि हुई है। यह जाति की राजनीति की धार को कुंद करने में मदद कर सकता है।

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है, “यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि अब से दो साल बाद क्या होने वाला है। लेकिन 2024 निश्चित रूप से 2015 जैसा नहीं होगा।” 

फिलहाल नीतीश कुमार के कदम ने भाजपा को बिहार विधानसभा में एकमात्र विपक्षी दल के रूप में छोड़ दिया है। टीओआई ने एक सूत्र के हवाले से कहा, “नीतीश कुमार अब थक चुके हैं। उनके खिलाफ राज्य में एक माहौल है। वो वोट बीजेपी को ट्रांसफर हो सकते हैं।”

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