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गुलाम को राज्यसभा भेजकर जम्मू-कश्मीर में क्या गुल खिलाएगी भाजपा, बड़ा है प्लान

भाजपा के इस फैसले की जम्मू-कश्मीर में खासतौर पर चर्चा हो रही है और इस पर बात हो रही है कि आखिर इससे पार्टी को क्या फायदा मिलेगा। इससे नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी की राजनीति को झटका लगने की भी चर्चा है।

भाजपा ने जम्मू-कश्मीर से मुस्लिमों के गुर्जर बकरवाल समुदाय से आने वाले गुलाम अली खटाना को राज्यसभा भेजा है। यह पहला मौका है, जब गुर्जर समुदाय के किसी नेता को जम्मू-कश्मीर से उच्च सदन में भेजा गया है। गुलाम अली खटाना ने उच्च सदन भेजे जाने पर कहा कि इससे पता चलता है कि भाजपा आखिरी आदमी के साथ भी न्याय करती है। यह देश के गरीब तबके के लिए जीत है। उन्होंने कहा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी ने समाज के उपेक्षित तबके के उत्थान का अपना वादा पूरा किया है। उन्होंने गुर्जर समुदाय से एक आम कार्यकर्ता को सदन में भेजा है।’ यही नहीं इस मौके पर रविंद्र रैना ने कहा कि भाजपा ने गुर्जर और बकरवाल समुदाय को आवाज दी है। अब तक कांग्रेस, एनसीपी और पीडीपी ने सिर्फ इनका इस्तेमाल ही किया था। 

भाजपा के इस फैसले की जम्मू-कश्मीर में खासतौर पर चर्चा हो रही है और इस पर बात हो रही है कि आखिर इससे पार्टी को क्या फायदा मिलेगा। दरअसल जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम वोट बैंक की सियासत नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस जैसे दल करते रहे हैं। यही नहीं एक वर्ग आर्टिकल 370 को हटाने और राज्य के पुनर्गठन से सभी मुस्लिमों की असहमति की बात करता रहा है। लेकिन गुर्जर बकरवाल और शिया समुदाय की राय थोड़ी अलग रही है। ऐसे में भाजपा इस वर्ग को अपने पाले में लाना चाहती है ताकि विपक्षी दलों के वोटबैंक में सेंध लगा सके। इसके अलावा जम्मू के बाहर भी वह अपनी पैठ बनाने के मौके तलाश रही है। माना जा रहा है कि गुलाम अली खटाना को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने यही समीकरण साधने की कोशिश की है।

गुर्जरों की है 13 से 15 फीसदी आबादी, मुस्लिमों में बढ़ेगी पैठ

आबादी के लिहाज से भी देखें तो गुर्जर बकरवाल समुदाय की संख्या केंद्र शासित प्रदेश में 13 से 15 फीसदी के करीब है। इनकी बड़ी आबादी मुस्लिम है और कुछ लोग हिंदू धर्म में भी आस्था रखते हैं। इस तरह भाजपा एक तरफ मुस्लिमों के बीच अपनी पैठ बना सकेगी तो वहीं देश भर में हिंदू गुर्जरों के भी इससे एक संदेश जाएगा। केंद्र सरकार के इस फैसले की गुर्जर समुदाय ने तारीफ की है। भाजपा मान रही है कि उसे इसका फायदा विधानसभा चुनाव में भी मिलेगा। जनजातीय समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाले जावेद राही कहते हैं कि दशकों से जम्मू-कश्मीर में जनजातीय समुदाय को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही हम लोग उम्मीद करते रहे हैं कि इससे गुर्जर और बकरवालों को फायदा मिलेगा। 

जम्मू-कश्मीर से इकलौते राज्यसभा सांसद होंगे खटाना

गुलाम अली खटाना को शनिवार को ही नामित करने का ऐलान किया गया था। वह फिलहाल जम्मू-कश्मीर से उच्च सदन में बैठने वाले इकलौते सदस्य होंगे। राज्य के सभी 4 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल फरवरी 2021 में समाप्त हो गया था, लेकिन उसके बाद से चुनाव नहीं हो सका था।  इसकी वजह यह है कि विधानसभा चुनावों में देरी हो रही है। 

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