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कंबोडिया में बोले राजनाथ- हम ऐसे समय में मिल रहे जब दुनिया विघटनकारी राजनीति से बढ़ते संघर्ष को देख रही

भारत-आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए  कंबोडिया के सिएम रीप पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज अपना संबोधन दिया। अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया विघटनकारी राजनीति से बढ़ते संघर्ष को देख रही है। दुनिया की सुरक्षा और समृद्धि के लिए शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक, आसियान पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। हमें उम्मीद है कि दक्षिण चीन सागर विवाद पर चल रही बातचीत पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से यूएनसीएलओएस के अनुरूप होगी। इसके लिए वैध अधिकारों और हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालना चाहिए।  अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तत्काल और दृढ़ हस्तक्षेप की आवश्यकता वाला सबसे बड़ा खतरा अंतरराष्ट्रीय और सीमा पार आतंकवाद है। उदासीनता अब प्रतिक्रिया नहीं हो सकती है, क्योंकि आतंकवाद ने विश्व स्तर पर  लोगों को पीड़ित किया है।  

साल 1992 से ही आसियान का भागीदार रहा भारत
बता दें कि भारत 1992 से आसियान का भागीदार रहा है और पहली एडीएमएम प्लस बैठक 12 अक्टूबर, 2010 को हनोई, वियतनाम में आयोजित की गई थी। 2017 से आसियान के रक्षा मंत्री आसियान प्लस देशों के बीच सहयोग पर चर्चा करने के लिए सालाना बैठक कर रहे हैं। भारत के एमओडी द्वारा प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत और आसियान ने नवंबर 2022 में एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए अपने रिश्ते को आगे बढ़ाया।

आसियान में  कुल 10 देश  
आसियान के 10 देशों में इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, लाओस, ब्रुनेई, फिलीपींस, सिंगापुर, कंबोडिया, मलेशिया और म्यांमार शामिल हैं। आसियान से भारत के संवाद संबंध 1992 में क्षेत्रीय साझेदारी की स्थापना के साथ शुरू हुए थे। ये दिसंबर 1995 में पूर्ण संवाद साझेदारी में और 2002 में शिखर स्तर की साझेदारी में परिवर्तित हुए। इन्हें 2012 में संबंधों के एक रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया गया था। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिएम रीप में कंबोडिया की अध्यक्षता वाली एडीएमएम प्लस सभा के दौरान 9वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक में इस बात पर भी जोर डाला कि कैसे आतंकवादी समूहों द्वारा धन हस्तांतरण और समर्थकों की भर्ती के लिए नए जमाने की तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि साइबर अपराधों का संगठित साइबर हमलों में परिवर्तन, राज्य और गैर-राज्यों द्वारा नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग की ओर इशारा करता है। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान इस बात का भी जिक्र किया कि पिछले महीने नई दिल्ली में आतंकवाद विरोधी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति की बैठक कैसे हुई थी, जिसने आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करने के लिए दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया था। एजेंसी

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